देहरादून: देशभर में ऊर्जा क्षेत्रों के सामने आ रही चुनौतियों के बीच उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने सूबे में बिजली आपूर्ति को सुचारू और मजबूत बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। ग्रिड इंडिया (Grid India) की हालिया रिपोर्ट और UPCL द्वारा जारी समीक्षा के अनुसार, जहां एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आधारित उत्पादन में कमी और जल विद्युत परियोजनाओं में कम जल प्रवाह जैसी बाधाएं हैं, वहीं दूसरी ओर UPCL के प्रभावी प्रबंधन के चलते उत्तराखंड में स्थिति कई अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी नियंत्रण में और बेहतर बनी हुई है।

चुनौतियों के बावजूद बेहतर नियंत्रण और रोस्टरिंग प्रबंधन

ग्रिड इंडिया की ‘डेली पावर सप्लाई पोजीशन रिपोर्ट’ के अनुसार, सितंबर 2026 के दौरान जहां पंजाब (91.2 मिलियन यूनिट), हरियाणा (68.9 मिलियन यूनिट) और महाराष्ट्र (42.9 मिलियन यूनिट) जैसे बड़े राज्यों में भारी विद्युत रोस्टरिंग दर्ज की गई, वहीं उत्तराखंड में यह आंकड़ा काफी कम (कुल 12.4 मिलियन यूनिट) रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि UPCL ने सीमित संसाधनों और पीक आवर्स के दौरान औसतन 350 मेगावाट की मांग-आपूर्ति के अंतर के बावजूद ग्रिड संतुलन को बेहतरीन तरीके से संभाला है।

वर्तमान में टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयों के तकनीकी रखरखाव और नदियों के जल प्रवाह में मौसमी कमी के कारण कुछ तकनीकी बाधाएं जरूर आई हैं, जिससे लगभग 100 MW क्षमता प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, ग्रिड की सुरक्षा (आवृत्ति 49.50 हर्ट्ज के आसपास रहने) को ध्यान में रखते हुए निगम ने न्यूनतम और बेहद सुनियोजित आपातकालीन कदम उठाए हैं।

प्रबंध निदेशक की सक्रिय पहल: एक सप्ताह में व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर UPCL के प्रबंध निदेशक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रबंध निदेशक ने व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए निम्नलिखित सकारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

  • त्वरित सुधार अभियान: आगामी एक सप्ताह के भीतर बिजली आपूर्ति और वितरण नेटवर्क में पूर्ण सुधार लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।
  • विशेष क्षेत्रीय अभियान: विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों को यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है कि मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों में रोस्टरिंग की आवश्यकता न्यूनतम हो।
  • विकास कार्यों के दौरान राहत: यह बेहद सख्त निर्देश दिए गए हैं कि नवीन निर्माण या विकास परियोजनाओं के नाम पर आम जनता या क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति को अनावश्यक रूप से बाधित न किया जाए।

UPCL की इस प्रोएक्टिव और दूरदर्शी कार्यशैली से यह स्पष्ट है कि निगम उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली उपलब्ध कराने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिससे आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed